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अंतर्राष्ट्रीय
Name 01/08/2020 : 05:13 AM
कोरोना वायरस के चलते फीकी हुई ईद की चमक
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संक्रमण के चलते लगे प्रतिबंधों, स्वास्थ्य दिशानिर्देशों और कोरोना के बढ़ते मामलों ने त्योहार के रंग को थोड़ा फीका कर दिया है।

इस बार ईद-उल-अज़हा के मौके पर कोरोना वायरस का असर साफ़ नज़र आ रहा है। संक्रमण के चलते लगे प्रतिबंधों, स्वास्थ्य दिशानिर्देशों और कोरोना के बढ़ते मामलों ने त्योहार के रंग को थोड़ा फीका कर दिया है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव समेत सभी दक्षिण एशियाई देशों की सरकारों ने लोगों से संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए सादगी से ईद मनाने की अपील की है। इसका असर पशुपालकों, व्यापारियों और ग्राहकों पर भी देखने को मिल रहा है। अब लोग बाज़ार जाने से ज़्यादा ऑनलाइन सामान ख़रीदने को तरज़ीह देने लगे हैं। दक्षिण एशिया में ईद-उल-अज़हा को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। ये मुसलमानों के प्रमुख त्योहारों में से एक है। दक्षिण एशियाई देशों ने बकरीद को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग, लॉकडाउन और अंतरराज्यीय परिवहन पर रोक जैसे नियम लागू किए हैं ताकि कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने 27 जुलाई के अपने संबोधन में लोगों से सादगी से त्योहार मनाने की अपील की थी और साथ ही चेताया था कि बड़ी संख्या में इकट्ठा होने से कोरोना के मामलों में तेज़ी आ सकती है। पाकिस्तान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ के दिशानिर्देशों में कम से कम यात्रा करने और ईद की नमाज़ पढ़ते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने जैसी हिदायतें दी गई हैं। पंजाब में प्रांतीय सरकार ने 28 जुलाई से 5 अगस्त तक ''स्मार्ट लॉकडाउन'' लागू किया है। 27 जुलाई के डॉन अख़बार में रिपोर्ट किया गया है कि चीफ़ सेक्रेट्री जव्वाद रफ़ीक़ ने कहा था कि ये फैसला सावर्जनिक हित में लिया गया है। बांग्लादेश में भी सरकार ने लोगों से खुली जगहों की बजाए अपनी नज़दीकी मस्जिदों में ही नमाज़ पढ़ने की अपील की है। बांग्लादेश के जहाजरानी मंत्री ख़ालिद महमूद चौधरी ने 24 जुलाई को लोगों से ईद के दौरान यात्रा करने से बचने और अपनी ज़िंदगी ख़तरे में ना डालने का आग्रह किया। ईद के दौरान हज़ारों लोग अपने घर आते हैं। भारत में भी कई राज्यों में घर पर ही ईद की नमाज़ पढ़ने की सलाह ज़ारी की गई है। कई धार्मिक नेताओं ने भी सरकारी नियमों का पालन करने की अपील की है। मालदीव में भी इस्लामिक मंत्रालय ने घोषणा की है की सावधानी बरतते हुए इस साल ईद की नमाज़ राजधानी माले के खुले मैदानों में नहीं होगी। इसके बजाए मस्जिदों में ही नमाज़ पढ़ी जाएगी।



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